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जर्मनी सेवानिवृत्ति की आयु 70 वर्ष तक बढ़ा सकता है, क्योंकि चीनी इलेक्ट्रिक वाहनों (EVs) की बढ़ती प्रतिस्पर्धा और वैश्विक आर्थिक चुनौतियां विकास को बाधित कर रही हैं।

जर्मनी सेवानिवृत्ति की आयु 70 वर्ष तक बढ़ा सकता है, क्योंकि चीनी इलेक्ट्रिक वाहनों (EVs) की बढ़ती प्रतिस्पर्धा और वैश्विक आर्थिक चुनौतियां विकास को बाधित कर रही हैं।

जर्मनी की निर्यात-आधारित अर्थव्यवस्था बढ़ते संरक्षणवाद, वैश्विक व्यापार में सुस्ती और चीन से कड़ी प्रतिस्पर्धा के कारण गंभीर दबाव में है। द वॉल स्ट्रीट जर्नल के अनुसार, इस वर्ष जर्मनी की GDP वृद्धि दर अधिकतम 1% रहने का अनुमान है।

मौजूदा आर्थिक सुस्ती कई वर्षों से चली आ रही ठहराव की स्थिति का परिणाम है। महामारी से पहले ही जर्मनी यूरोजोन के अन्य देशों की तुलना में पीछे रहने लगा था। विनिर्माण क्षेत्र में रोजगार पिछले दस वर्षों के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया है, जबकि 2020 से कॉर्पोरेट निवेश लगातार घट रहा है।

जर्मन उद्योग के सामने सबसे बड़ी चुनौती चीन की बदलती भूमिका रही है। जो देश कभी जर्मनी के लिए एक लाभदायक बाजार था, वही अब एक प्रत्यक्ष और आक्रामक प्रतिस्पर्धी बन गया है। इलेक्ट्रिक वाहन (EV), मशीन टूल्स और औद्योगिक उपकरण बनाने वाली चीनी कंपनियां अब केवल एशिया ही नहीं, बल्कि पूरे यूरोप में भी जर्मन कंपनियों को पीछे छोड़ रही हैं। स्थिति को और गंभीर बनाते हुए, बीजिंग द्वारा दुर्लभ पृथ्वी धातुओं (Rare Earth Metals) के निर्यात पर लगाए गए प्रतिबंधों ने जर्मनी के इंजीनियरिंग, ऑटोमोबाइल और रक्षा क्षेत्रों की आपूर्ति शृंखलाओं को पहले ही प्रभावित कर दिया है।

बाहरी दबाव भी लगातार बढ़ रहा है। मध्य पूर्व का संघर्ष ऊर्जा कीमतों को ऊंचे स्तर पर बनाए हुए है, जबकि अमेरिका द्वारा लगाए गए टैरिफ निर्यातकों के मुनाफे के मार्जिन को प्रभावित कर रहे हैं। इसके अलावा, जर्मन व्यवसायों को अमेरिका पर अपनी तकनीकी निर्भरता का भी प्रत्यक्ष अनुभव हुआ है। हाल ही में Anthropic के नए AI मॉडलों पर अमेरिका द्वारा लगाए गए निर्यात प्रतिबंधों के कारण कुछ यूरोपीय कंपनियां अत्याधुनिक न्यूरल नेटवर्क तक पहुंच से वंचित हो गई हैं।

चांसलर फ्रेडरिक मर्ज़ की सरकार अर्थव्यवस्था को पुनर्जीवित करने का प्रयास कर रही है। सरकार ने व्यवसायों के लिए कर रियायतें लागू की हैं, ऊर्जा कीमतों में कमी की है और बुनियादी ढांचे तथा रक्षा क्षेत्र में सरकारी निवेश बढ़ाया है। सबसे बड़ा और विवादास्पद कदम सेवानिवृत्ति की आयु 67 वर्ष से बढ़ाकर 70 वर्ष करने की घोषित योजना है।

हालांकि, अर्थशास्त्रियों का मानना है कि ये कदम पर्याप्त नहीं हैं। उनका कहना है कि सरकार को व्यापक संरचनात्मक सुधार लागू करने होंगे—नौकरशाही में भारी कटौती, चीन पर निर्भरता कम करने के लिए महत्वपूर्ण पुर्जों का स्थानीय उत्पादन और स्टार्टअप्स में बड़े पैमाने पर निवेश। यूरोप की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था के सामने अपने प्रमुख उद्योगों—रसायन, ऑटोमोबाइल निर्माण और इंजीनियरिंग—को बचाने की कठिन चुनौती खड़ी है।

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